Election Contest Will Be Interesting In Mant Assembly Of Mathura – यूपी चुनाव 2022: मथुरा के मांट में आठ बार के विधायक की घेराबंदी में जुटी भाजपा, सपा और कांग्रेस

सार

मांट विधानसभा जाट बाहुल्य है। यहां एक लाख से अधिक जाट मतदाता बताए जाते हैं। चुनाव में इन मतदाताओं की निर्णायक भूमिका होती है। 

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मथुरा जिले के जाट बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र मांट से श्याम सुंदर शर्मा आठ बार विधायक बने हैं। उन्होंने कभी बसपा तो कभी तृणमूल कांग्रेस, निर्दलीय और कांग्रेस के बैनर तले विधायकी की है। इस बार वह फिर से बसपा के उम्मीदवार हैं। भाजपा, सपा व कांग्रेस इस बार श्याम सुंदर शर्मा की घेराबंदी कर रही है। 
भाजपा ने अपने पुराने चेहरे एसके शर्मा को बदलते हुए नए उम्मीदवार राजेश चौधरी पर दांव खेला है। सपा-रालोद गठबंधन ने योगेश नौहवार की जगह संजय लाठर को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस से भी जाट उम्मीदवार सुमन चौधरी मैदान में उतरीं हैं। अब इन सभी दलों की कोशिश बसपा के विजय अभियान को रोकने की है। 
वहीं बसपा उम्मीदवार की कोशिश ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्ग के सहारे अपनी विजयी पताका को नौवीं बार फहराने की है। मांट क्षेत्र को विकास की तस्वीर दिखा रहे राजेश चौधरी के सहारे भाजपा की कोशिश जाटों के साथ ठाकुर, ब्राह्मण और अन्य पिछड़े वर्ग के गठजोड़ से यहां कमल खिलाने की है। 

जाट बाहुल्य है मांट 
मांट विधानसभा जाट बाहुल्य है। यहां एक लाख से अधिक जाट मतदाता बताए जाते हैं। इसके बाद यहां करीब 55 हजार ब्राह्मण मतदाताओं की मौजूदगी है। दलितों की संख्या 42 हजार तो ठाकुरों की छत्तीसी में उनकी मतदाता के रूप में मौजूदगी करीब 38 हजार है। 

मुस्लिम 22 हजार, 20 हजार वैश्य और गुर्जर, बघेल और निषाद 12-12 हजार हैं। श्याम सुंदर शर्मा इन सभी जातियों में अपनी पकड़ रखते हैं, लेकिन उनकी इसी पकड़ को कमजोर करने के लिए राजेश चौधरी और संजय लाठर राजनीतिक गोटियां बिछा रहे हैं। कांग्रेस भी कवायद में जुटी है। 

ऐसा था पिछला विधानसभा चुनाव 
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एसके शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा था तो रालोद से योगेश नौहवार और बसपा से श्याम सुंदर शर्मा चुनाव लड़े थे। जीत भले ही श्याम सुंदर शर्मा की हुई थी, लेकिन रालोद के योगेश नौहवार से महज 432 मतों से हार थे। यह अब तक की सबसे नजदीकी हार-जीत मांट के लिए थी। 

जातीय समीकरण: 
इस सीट पर जाट बाहुल्यता के साथ ब्राह्मण, ठाकुर, मुस्लिम, जाटव, निषाद, बघेल, वैश्य और गुर्जर व अन्य जातियों के वोट हैं। मुस्लिम, जाटव, बघेल, निषाद निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

पहचान:  यहां नौहझील में झाड़ी वाले हनुमान बाबा, कृष्णलीला स्थली भांडीर वन और राधारानी का मानसरोवर स्थित मंदिर।

मतदाताओं पर एक नजर-
कुल मतदाता- 343728
पुरुष -183335
महिला -160353
अन्य -18

 विधानसभा 2017 का परिणाम
– श्याम सुंदर शर्मा बसपा 65862 , 31.27 प्रतिशत
– योगेश चौधरी रालोद 65430, 31.07 प्रतिशत
– सतीश कुमार शर्मा भाजपा 59871 , 28.43प्रतिशत
– जगदीश सिंह कांग्रेस 1327, 06.30 प्रतिशत
2022 के प्रत्याशी
बसपा- श्याम सुंदर शर्मा
भाजपा- राजेश चौधरी
सपा- संजय लाठर
कांग्रेस- सुमन चौधरी

जनता ही मेरी ताकत है- श्यामसुंदर
बसपा प्रत्याशी श्यामसुंदर शर्मा ने बताया कि जनता ही मेरी ताकत है। मैं जनता और जनता मेरे लिए बनी है। हम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। मेरी पांच मजबूती में जनता से किया गया प्रत्येक वायदा निभाना, उनके हर दुख दर्द का मैं हिस्सा हूं, लोगों की हर संभव करना, विकास कार्यों के लिए निरंतर प्रगतिशील रहना। 

पिछले चुनाव के प्रतिद्वंद्वी
रालोद नेता योगेश नौहवार ने कहा कि उनसे सिर्फ लच्छेदार बातें अवश्य सुनने को मिलती हैं। 30 साल पहले था मांट क्षेत्र आज भी वैसा ही है। तहसील मुख्यालय को नगर पंचायत का दर्जा तक नहीं मिला है। नौहझील भी ग्राम पंचायत है। एक भी फैक्ट्री नहीं है।

विस्तार

मथुरा जिले के जाट बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र मांट से श्याम सुंदर शर्मा आठ बार विधायक बने हैं। उन्होंने कभी बसपा तो कभी तृणमूल कांग्रेस, निर्दलीय और कांग्रेस के बैनर तले विधायकी की है। इस बार वह फिर से बसपा के उम्मीदवार हैं। भाजपा, सपा व कांग्रेस इस बार श्याम सुंदर शर्मा की घेराबंदी कर रही है। 

भाजपा ने अपने पुराने चेहरे एसके शर्मा को बदलते हुए नए उम्मीदवार राजेश चौधरी पर दांव खेला है। सपा-रालोद गठबंधन ने योगेश नौहवार की जगह संजय लाठर को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस से भी जाट उम्मीदवार सुमन चौधरी मैदान में उतरीं हैं। अब इन सभी दलों की कोशिश बसपा के विजय अभियान को रोकने की है। 

वहीं बसपा उम्मीदवार की कोशिश ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्ग के सहारे अपनी विजयी पताका को नौवीं बार फहराने की है। मांट क्षेत्र को विकास की तस्वीर दिखा रहे राजेश चौधरी के सहारे भाजपा की कोशिश जाटों के साथ ठाकुर, ब्राह्मण और अन्य पिछड़े वर्ग के गठजोड़ से यहां कमल खिलाने की है। 

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