Up Election 2022: After Leaving Bjp By Top Obc Leaders, Now Bjp Has Changed The Stretgy Of Ticket Distrubution In Uttar Pradesh – उत्तर प्रदेश चुनाव: ओबीसी नेताओं के पार्टी छोड़ने का असर, अब केवल 50 से 60 विधायकों का टिकट काटेगी भाजपा!

सार

चौकन्नी भाजपा ने लगभग आधे विधायकों को नए चेहरों से बदलने करने की योजना बनाई थी। आशंका जताई जा रही थी कि भाजपा के कुल 312 विधायकों में से लगभग 150 के टिकट काटे जा सकते हैं। बाद की परिस्थितियों में यह संख्या करीब 100 कर दी गई, लेकिन इसी बीच कई बड़े विकट गिरने से पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया है

लखनऊ में भाजपा प्रदेश चुनाव समिति की बैठक
– फोटो : Amar Ujala (File Photo)

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स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ आठ भाजपा विधायकों ने शुक्रवार को सपा का दामन थाम लिया। आशंका जताई जा रही है कि अभी सरकार के कुछ और बड़े विकट गिर सकते हैं। इसके बीच भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। उसके बड़े नेता लगातार विधायकों से संपर्क कर रहे हैं और उनका मूड भांपने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी सबसे ज्यादा टिकट बदलने की रणनीति पर भी पुनर्विचार कर रही है। पार्टी यूपी चुनाव में बाकी बची सीटों पर केवल 50 से 60 विधायकों के टिकट काट सकती है। 172 सीटों पर उम्मीदवारों के बारे में पहले ही फैसला लिया जा चुका है। भाजपा की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट शनिवार या रविवार तक सामने आ सकती है।

डेढ़ सौ टिकट कटने की आशंका!

शुरुआती दौर में जनप्रतिनिधियों के बारे में खासी नाराजगी की खबर से चौकन्नी भाजपा ने लगभग आधे विधायकों को नए चेहरों से बदलने करने की योजना बनाई थी। आशंका जताई जा रही थी कि भाजपा के कुल 312 विधायकों में से लगभग डेढ़ सौ के टिकट काटे जा सकते हैं। बाद की परिस्थितियों में यह संख्या करीब 100 कर दी गई थी। लेकिन इसी बीच कई बड़े विकट गिरने से पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया है। बाकी बची सीटों पर अब केवल उन्हीं विधायकों या मंत्रियों का टिकट काटा जाएगा, जिनके खिलाफ जनता में बहुत ज्यादा आक्रोश है।

टिकट बंटवारे के लिए तीन-तीन सर्वे

दरअसल, भाजपा ने चुनाव पूर्व विधायकों और मंत्रियों के बारे में तीन अलग-अलग सर्वेक्षण कराया था। इसमें यह जानने की कोशिश की गई थी कि क्षेत्र की जनता अपने प्रतिनिधियों से कितनी संतुष्ट या नाराज है। इसमें पार्टी संगठन द्वारा किया गया सर्वे और आरएसएस के सर्वे के साथ-साथ एक निजी कंपनी की ओर से किया गया स्वतंत्र सर्वे भी शामिल है। इन सर्वेक्षणों में यह बात निकलकर सामने आई थी कि जनता केंद्र सरकार या राज्य सरकार की नीतियों से तो संतुष्ट है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ काफी नाराजगी उभर कर सामने आई थी। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने भारी संख्या में नए उम्मीदवार उतारकर जनता के इस आक्रोश को थामने की रणनीति बनाई थी।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जनता के बीच केंद्र और राज्य सरकार को लेकर कोई गहरी नाराजगी नहीं है। समाज के एक बड़े वर्ग का समर्थन उसे हासिल है। पार्टी ओबीसी और दलित जातियों के उत्थान के लिए संकल्प पत्र में नई योजनाओं को शामिल कर ओबीसी और दलित समाज को साधने की कोशिश करेगी।

विस्तार

स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ आठ भाजपा विधायकों ने शुक्रवार को सपा का दामन थाम लिया। आशंका जताई जा रही है कि अभी सरकार के कुछ और बड़े विकट गिर सकते हैं। इसके बीच भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। उसके बड़े नेता लगातार विधायकों से संपर्क कर रहे हैं और उनका मूड भांपने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी सबसे ज्यादा टिकट बदलने की रणनीति पर भी पुनर्विचार कर रही है। पार्टी यूपी चुनाव में बाकी बची सीटों पर केवल 50 से 60 विधायकों के टिकट काट सकती है। 172 सीटों पर उम्मीदवारों के बारे में पहले ही फैसला लिया जा चुका है। भाजपा की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट शनिवार या रविवार तक सामने आ सकती है।

डेढ़ सौ टिकट कटने की आशंका!

शुरुआती दौर में जनप्रतिनिधियों के बारे में खासी नाराजगी की खबर से चौकन्नी भाजपा ने लगभग आधे विधायकों को नए चेहरों से बदलने करने की योजना बनाई थी। आशंका जताई जा रही थी कि भाजपा के कुल 312 विधायकों में से लगभग डेढ़ सौ के टिकट काटे जा सकते हैं। बाद की परिस्थितियों में यह संख्या करीब 100 कर दी गई थी। लेकिन इसी बीच कई बड़े विकट गिरने से पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया है। बाकी बची सीटों पर अब केवल उन्हीं विधायकों या मंत्रियों का टिकट काटा जाएगा, जिनके खिलाफ जनता में बहुत ज्यादा आक्रोश है।

टिकट बंटवारे के लिए तीन-तीन सर्वे

दरअसल, भाजपा ने चुनाव पूर्व विधायकों और मंत्रियों के बारे में तीन अलग-अलग सर्वेक्षण कराया था। इसमें यह जानने की कोशिश की गई थी कि क्षेत्र की जनता अपने प्रतिनिधियों से कितनी संतुष्ट या नाराज है। इसमें पार्टी संगठन द्वारा किया गया सर्वे और आरएसएस के सर्वे के साथ-साथ एक निजी कंपनी की ओर से किया गया स्वतंत्र सर्वे भी शामिल है। इन सर्वेक्षणों में यह बात निकलकर सामने आई थी कि जनता केंद्र सरकार या राज्य सरकार की नीतियों से तो संतुष्ट है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ काफी नाराजगी उभर कर सामने आई थी। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने भारी संख्या में नए उम्मीदवार उतारकर जनता के इस आक्रोश को थामने की रणनीति बनाई थी।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जनता के बीच केंद्र और राज्य सरकार को लेकर कोई गहरी नाराजगी नहीं है। समाज के एक बड़े वर्ग का समर्थन उसे हासिल है। पार्टी ओबीसी और दलित जातियों के उत्थान के लिए संकल्प पत्र में नई योजनाओं को शामिल कर ओबीसी और दलित समाज को साधने की कोशिश करेगी।

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