Up Election 2022: Bhim Army Chief Chandrashekhar Azad Accuses Akhilesh Yadav And Sp Of Being Anti-dalit – उत्तर प्रदेश चुनाव: कहीं भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद की ‘महत्वाकांक्षाएं’ उन्हें हाशिए पर न ले जाएं

अतुल सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 15 Jan 2022 03:17 PM IST

सार

चंद्रशेखर आजाद की प्रेस कांफ्रेस पर गौर कीजिए तो उनकी बेचैनी नजर आ जाती है। वे खुलकर कहते हैं कि पिछले एक महीने दस दिनों से वे लगातार अखिलेश यादव के संपर्क में हैं, पिछले दो दिनों से पीठ में दर्द के बाद भी लखनऊ में एक उम्मीद से डटे हुए हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने उनके साथ धोखा किया है..

चंद्रशेखर आजाद भीम आर्मी
– फोटो : Agency

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उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के नाम पर समाजवादी पार्टी जिस तरह की गोलबंदी कर रही है क्या सचमुच चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी उससे बाहर है। दरअसल भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद जिस तरह से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस से ढाई घंटे पहले ही प्रेस कांफ्रेंस करके सपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि अखिलेश के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या और उनके समर्थकों के आगे चंद्रशेखर आजाद कहीं नहीं ठहरते। सूत्र बताते हैं कि शुरू में अखिलेश यादव ने भीम आर्मी को दो-तीन सीटें देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन पिछले दो दिनों में समीकरण उलट गए और चंद्रशेखर आजाद को सपा ने कुछ और इंतजार करने का संकेत दे दिया।

कोई ठोस आश्वासन नहीं

चंद्रशेखर आजाद की प्रेस कांफ्रेस पर गौर कीजिए तो उनकी बेचैनी नजर आ जाती है। वे खुलकर कहते हैं कि पिछले एक महीने दस दिनों से वे लगातार अखिलेश यादव के संपर्क में हैं, पिछले दो दिनों से पीठ में दर्द के बाद भी लखनऊ में एक उम्मीद से डटे हुए हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने उनके साथ धोखा किया है। साफ है कि अखिलेश यादव ने उन्हें साथ रहने को तो कहा है लेकिन अभी सीटों के बारे में कोई भरोसा नहीं दिया है। खासकर शुक्रवार को स्वामी प्रसाद मौर्या के भव्य स्वागत और भविष्य में उनकी बढ़ती हैसियत से भी चंद्रशेखर परेशान और खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

ऐसे में उन्हें बहन जी भी याद आती हैं और वे उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए साफ कहते हैं कि पहले उन्होंने बसपा के साथ तालमेल की कोशिश की, लेकिन बहन जी ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। वे बार-बार भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने की बात भी करते हैं। मान्यवर कांशीराम का जिक्र भी चार-पांच बार करते हैं और खुद को उनका असली अनुयायी बताते हैं। फिर वे कांशीराम और मुलायम सिंह के गठबंधन को भी याद करते हैं और ये भी आरोप लगाते हैं कि तब कांशीराम को सपा ने धोखा दिया। ये सब बार-बार दोहराते हुए भी चंद्रशेखर सपा के साथ गठबंधन और मनमाफिक सीटों की मांग की कोशिश करते रहे हैं।

अखिलेश के रवैये ने बढ़ाई बेचैनी

उन्हें शायद ये अहसास हो रहा है कि फिलहाल न तो उन्हें बसपा साथ चाहती है, न ही सपा। कांग्रेस पहले ही एकदम अलग-थलग हर सीट पर अकेले लड़ रही है। ऐसे में चंद्रशेखर जाएं तो जाएं कहां। अखिलेश की छोटी पार्टियों को साथ जोड़ने के फॉर्मूले ने उनके लिए उम्मीद जगाई थी, लेकिन अखिलेश के टाल-मटोल वाले रवैये ने उनकी बेचैनी और बढ़ा दी है।

भीम आर्मी के ही एक कार्यकर्ता ने अमर उजाला को बताया कि लगता है कि चंद्रशेखर आजाद ने अफरातफरी में प्रेस कांफ्रेस करके अपने रास्ते बंद कर लिए। उन्हें अभी और इंतजार करना चाहिए था। कहीं इससे उनके समर्थक भी छिटक न जाएं। कुछ महीने पहले तक चंद्रशेखर आजाद के समर्थक रहे एक दलित पत्रकार का कहना है कि कुछ इलाकों में भीम आर्मी का प्रभाव जरूर है, लेकिन इससे ये नहीं मान लेना चाहिए कि प्रदेश के सभी दलित, पिछड़े, अति पिछड़े और वंचित समाज के लोग इसे पसंद ही करते हैं। इस समय व्यापक हित में सभी को एक होना चाहिए और भाजपा को हराने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं की वजह से अलग-थलग होने की हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए।

विस्तार

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के नाम पर समाजवादी पार्टी जिस तरह की गोलबंदी कर रही है क्या सचमुच चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी उससे बाहर है। दरअसल भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद जिस तरह से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस से ढाई घंटे पहले ही प्रेस कांफ्रेंस करके सपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि अखिलेश के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या और उनके समर्थकों के आगे चंद्रशेखर आजाद कहीं नहीं ठहरते। सूत्र बताते हैं कि शुरू में अखिलेश यादव ने भीम आर्मी को दो-तीन सीटें देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन पिछले दो दिनों में समीकरण उलट गए और चंद्रशेखर आजाद को सपा ने कुछ और इंतजार करने का संकेत दे दिया।

कोई ठोस आश्वासन नहीं

चंद्रशेखर आजाद की प्रेस कांफ्रेस पर गौर कीजिए तो उनकी बेचैनी नजर आ जाती है। वे खुलकर कहते हैं कि पिछले एक महीने दस दिनों से वे लगातार अखिलेश यादव के संपर्क में हैं, पिछले दो दिनों से पीठ में दर्द के बाद भी लखनऊ में एक उम्मीद से डटे हुए हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने उनके साथ धोखा किया है। साफ है कि अखिलेश यादव ने उन्हें साथ रहने को तो कहा है लेकिन अभी सीटों के बारे में कोई भरोसा नहीं दिया है। खासकर शुक्रवार को स्वामी प्रसाद मौर्या के भव्य स्वागत और भविष्य में उनकी बढ़ती हैसियत से भी चंद्रशेखर परेशान और खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

ऐसे में उन्हें बहन जी भी याद आती हैं और वे उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए साफ कहते हैं कि पहले उन्होंने बसपा के साथ तालमेल की कोशिश की, लेकिन बहन जी ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। वे बार-बार भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने की बात भी करते हैं। मान्यवर कांशीराम का जिक्र भी चार-पांच बार करते हैं और खुद को उनका असली अनुयायी बताते हैं। फिर वे कांशीराम और मुलायम सिंह के गठबंधन को भी याद करते हैं और ये भी आरोप लगाते हैं कि तब कांशीराम को सपा ने धोखा दिया। ये सब बार-बार दोहराते हुए भी चंद्रशेखर सपा के साथ गठबंधन और मनमाफिक सीटों की मांग की कोशिश करते रहे हैं।

अखिलेश के रवैये ने बढ़ाई बेचैनी

उन्हें शायद ये अहसास हो रहा है कि फिलहाल न तो उन्हें बसपा साथ चाहती है, न ही सपा। कांग्रेस पहले ही एकदम अलग-थलग हर सीट पर अकेले लड़ रही है। ऐसे में चंद्रशेखर जाएं तो जाएं कहां। अखिलेश की छोटी पार्टियों को साथ जोड़ने के फॉर्मूले ने उनके लिए उम्मीद जगाई थी, लेकिन अखिलेश के टाल-मटोल वाले रवैये ने उनकी बेचैनी और बढ़ा दी है।

भीम आर्मी के ही एक कार्यकर्ता ने अमर उजाला को बताया कि लगता है कि चंद्रशेखर आजाद ने अफरातफरी में प्रेस कांफ्रेस करके अपने रास्ते बंद कर लिए। उन्हें अभी और इंतजार करना चाहिए था। कहीं इससे उनके समर्थक भी छिटक न जाएं। कुछ महीने पहले तक चंद्रशेखर आजाद के समर्थक रहे एक दलित पत्रकार का कहना है कि कुछ इलाकों में भीम आर्मी का प्रभाव जरूर है, लेकिन इससे ये नहीं मान लेना चाहिए कि प्रदेश के सभी दलित, पिछड़े, अति पिछड़े और वंचित समाज के लोग इसे पसंद ही करते हैं। इस समय व्यापक हित में सभी को एक होना चाहिए और भाजपा को हराने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं की वजह से अलग-थलग होने की हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए।

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