Upsc Raised Questions On Panel Sent By State Government For The Appointment Of A New Dgp In Punjab – झटका: चहेते अफसर को डीजीपी बनाने की कोशिश हुई नाकाम, यूपीएससी ने चन्नी सरकार के भेजे पैनल पर उठाए सवाल

सार

यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पैनल पर सबसे पहला ऐतराज ‘कट आफ डेट’ को लेकर किया है। यूपीएससी का कहना है कि पंजाब सरकार ने 30 सितंबर को जो पैनल भेजा, उसमें पूर्व डीजीपी दिनकर गुप्ता का नाम भी शामिल है, जबकि दिनकर गुप्ता उस समय अवकाश पर थे, यानी उस समय प्रदेश का डीजीपी का पद खाली नहीं था। 

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पंजाब में नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर नया पेंच फंस गया है। राज्य सरकार ने सीनियर अधिकारियों के नामों का जो पैनल यूपीएससी को भेजा था, उस पर कई तरह की आपत्तियां लग गई हैं। इसके चलते जहां राज्य सरकार को नए सिरे से पैनल भेजना पड़ेगा, वहीं जिस अधिकारी विशेष को डीजीपी लगाने के लिए मुख्यमंत्री चन्नी की सरकार ने यह कवायद शुरू की थी, उसका नाम तय नियमों के कारण नए पैनल से बाहर रह जाने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि चहेते अफसर रिटायरमेंट के करीब हैं। यूपीएससी का कहना है कि जो डीजीपी पद पर तैनात है, उसका नाम पैनल में कैसे भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार, यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पैनल पर सबसे पहला ऐतराज ‘कट आफ डेट’ को लेकर किया है। यूपीएससी का कहना है कि पंजाब सरकार ने 30 सितंबर को जो पैनल भेजा, उसमें पूर्व डीजीपी दिनकर गुप्ता का नाम भी शामिल है, जबकि दिनकर गुप्ता उस समय अवकाश पर थे, यानी उस समय प्रदेश का डीजीपी का पद खाली नहीं था।

ऐसे में पैनल भेजने का ही औचित्य नहीं रह जाता, क्योंकि डीजीपी का पद भरा था और उसी डीजीपी का नाम डीजीपी लगाने के लिए भी भेज दिया गया। यूपीएससी का कहना है कि दिनकर गुप्ता चार अक्तूबर तक एक हफ्ते के अवकाश पर गए थे, तब चार अक्तूबर को सरकार ने गुप्ता को हटाकर इकबाल प्रीत सिंह सहोता को कार्यकारी डीजीपी नियुक्त कर दिया। इस लिहाज से पैनल की ‘कट आफ डेट’ 5 अक्तूबर बनती है, क्योंकि पंजाब में 5 अक्तूबर को डीजीपी का पद खाली हुआ है।

यूपीएससी के इस एतराज के बाद पंजाब सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि डीजीपी पद के लिए भेजे पैनल में दिनकर गुप्ता, इकबाल प्रीत सिंह सहोता के अलावा सबसे सीनियर अधिकारी एस. चट्टोपाध्याय, एमके तिवारी और रोहित चौधरी के नाम भी शामिल हैं। 
अब समस्या यह है कि अगर यूपीएससी के अनुसार ‘कट आफ डेट’ 4 अक्तूबर मानकर पैनल को भेजा जाता है तो एस. चट्टोपाध्याय, रोहित चौधरी और एमके तिवारी आगामी 31 मार्च 2022 को रिटायर होने वाले हैं। वहीं पैनल में भेजे जाने वाले नामों को लेकर एक शर्त यह भी है कि संबंधित अधिकारी के पास कम से कम छह माह का कार्यकाल बाकी बचा हो।

ऐसे में 30 सितंबर की ‘कट आफ डेट’ तो राज्य सरकार को अपने चहेते अफसर को डीजीपी बनाने में सहायक साबित हो सकती है, लेकिन 4 अक्तूबर के हिसाब से तीनों अफसरों के पास लगभग 5 महीने का कार्यकाल भी शेष रह जाता है, जो उन्हें डीजीपी पद की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।

नवजोत सिद्धू ने चहेते अफसर के लिए छोड़ दी थी प्रधानी
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने जब अपने पसंदीदा अधिकारी इकबाल प्रीत सिंह सहोता को कार्यकारी डीजीपी नियुक्त किया तो पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू को यह इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने प्रधान पद से अपना इस्तीफा पार्टी हाईकमान को भेज दिया। दरअसल सिद्धू डीजीपी पद पर एस. चट्टोपाध्याय को नियुक्त कराने के इच्छुक हैं और इसके लिए उन्होंने इस्तीफे जैसा कदम तक उठाया। 

आखिरकार सिद्धू के दबाव में ही हाईकमान के इशारे पर चन्नी सरकार ने नए डीजीपी के लिए अफसरों का पैनल यूपीएससी को भेजा, जिसमें से यूपीएससी की ओर से राज्य सरकार को तीन नाम सुझाए जाने थे और उन्हीं में से किसी एक को डीजीपी बनाया जाना था। लेकिन यूपीएससी की आपत्तियों ने नवजोत सिद्धू की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
यूपीएससी के नियमानुसार, अगर राज्य सरकार 4 अक्तूबर को ‘कट आफ डेट’ के आधार पर नया पैनल यूपीएससी को भेजती है तो एस. चट्टोपाध्याय, एमके तिवारी और रोहित चौधरी के नाम इस आधार पर बाहर हो जाएंगे कि उनका कार्यकाल छह माह भी नहीं रह गया है। ऐसे में यह बाजी इकबाल प्रीत सिंह सहोता के हाथ लग सकती है, क्योंकि उनके रिटायर होने में अभी काफी समय है। फिलहाल मौजूदा पैनल में सहोता का नाम सातवें नंबर पर रखा गया था।
 

विस्तार

पंजाब में नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर नया पेंच फंस गया है। राज्य सरकार ने सीनियर अधिकारियों के नामों का जो पैनल यूपीएससी को भेजा था, उस पर कई तरह की आपत्तियां लग गई हैं। इसके चलते जहां राज्य सरकार को नए सिरे से पैनल भेजना पड़ेगा, वहीं जिस अधिकारी विशेष को डीजीपी लगाने के लिए मुख्यमंत्री चन्नी की सरकार ने यह कवायद शुरू की थी, उसका नाम तय नियमों के कारण नए पैनल से बाहर रह जाने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि चहेते अफसर रिटायरमेंट के करीब हैं। यूपीएससी का कहना है कि जो डीजीपी पद पर तैनात है, उसका नाम पैनल में कैसे भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार, यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पैनल पर सबसे पहला ऐतराज ‘कट आफ डेट’ को लेकर किया है। यूपीएससी का कहना है कि पंजाब सरकार ने 30 सितंबर को जो पैनल भेजा, उसमें पूर्व डीजीपी दिनकर गुप्ता का नाम भी शामिल है, जबकि दिनकर गुप्ता उस समय अवकाश पर थे, यानी उस समय प्रदेश का डीजीपी का पद खाली नहीं था।

ऐसे में पैनल भेजने का ही औचित्य नहीं रह जाता, क्योंकि डीजीपी का पद भरा था और उसी डीजीपी का नाम डीजीपी लगाने के लिए भी भेज दिया गया। यूपीएससी का कहना है कि दिनकर गुप्ता चार अक्तूबर तक एक हफ्ते के अवकाश पर गए थे, तब चार अक्तूबर को सरकार ने गुप्ता को हटाकर इकबाल प्रीत सिंह सहोता को कार्यकारी डीजीपी नियुक्त कर दिया। इस लिहाज से पैनल की ‘कट आफ डेट’ 5 अक्तूबर बनती है, क्योंकि पंजाब में 5 अक्तूबर को डीजीपी का पद खाली हुआ है।

यूपीएससी के इस एतराज के बाद पंजाब सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि डीजीपी पद के लिए भेजे पैनल में दिनकर गुप्ता, इकबाल प्रीत सिंह सहोता के अलावा सबसे सीनियर अधिकारी एस. चट्टोपाध्याय, एमके तिवारी और रोहित चौधरी के नाम भी शामिल हैं। 

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