Uttarakhand Chunav 2022: In The Riot Of New Wrestlers, The Bjp Is Trying To Save The Fort – Uttarakhand Chunav 2022: नए पहलवानों के दंगल में दांव पर धुरंधर, भाजपा दुर्ग बचाने, कांग्रेस ढहाने और निर्दलीय सेंध लगाने में जुटे

सार

कांग्रेस सिख और मुसलिम बहुल क्षेत्रों में पैठ बनाने और सत्तारोधी रुझान को वोटों में बदलने की कोशिश कर रही है।

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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की डोईवाला विधानसभा सीट के चुनावी दंगल में बेशक चिर प्रतिद्वंद्वी भाजपा और कांग्रेस ने नए पहलवान उतारे हैं, लेकिन मुकाबले से बाहर होने के बावजूद यहां दो सियासी धुरंधरों की प्रतिष्ठा भी दांव पर मानी जा रही है।

भाजपा अपने दुर्ग को बचाने, कांग्रेस इसे ढहाने और बगावत कर ताल ठोक रहे निर्दलीय दुर्ग में सेंध लगाने के लिए दांव पर दांव चल रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह इस बार भाजपा ने बृजभूषण गैरोला पर दांव लगाया है। वह त्रिवेंद्र की पसंद बताए जाते हैं।

यहां त्रिवेंद्र के ही नहीं हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र की सीट होने के नाते सांसद व पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के सियासी पकड़ की भी परीक्षा है। यही वजह है कि पार्टी प्रत्याशी के लिए दोनों दिग्गज भी दमखम लगा रहे हैं। भाजपा के बागी जितेंद्र नेगी के चुनाव मैदान में होने से कांग्रेस फायदे की उम्मीद में है।

ये भी पढ़ें…Uttarakhand Election 2022:  प्रधानमंत्री टिहरी जिले के मतदाताओं को करने वाले वर्चुअली संबोधित, लेकिन कार्यक्रम हुआ स्थगित

भाजपा और कांग्रेस की मिश्रित हवा है। आम आदमी पार्टी, उक्रांद समेत सभी 10 प्रत्याशी कोशिश में हैं कि अपने-अपने मजबूत दायरे से बाहर आकर चिर प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दे सकें। भाजपा त्रिवेंद्र राज के काम और मोदी मैजिक के भरोसे फिर भगवा बुलंद करने के मंसूबों के साथ मैदान में है।

कांग्रेस सिख और मुसलिम बहुल क्षेत्रों में पैठ बनाने और सत्तारोधी रुझान को वोटों में बदलने की कोशिश कर रही है। राज्य गठन के बाद पहली बार डोईवाला के समर में भाजपा और कांग्रेस ने स्थानीय उम्मीदवार मैदान में उतारा है। इसलिए खामोश नजर आने वाला मतदाता कह रहा है कि जीते कोई भी विधायक तो अपना (स्थानीय) ही होगा।

स्थानीय मुद्दे
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रो बोनो एग्रीमेंट, जंगली जानवरों की समस्या, बेरोजगार, किसानों के बकाया भुगतान की व्यवस्था, शिक्षा और सड़क आदि।

मतदाता कुल  
165776
महिला 80999
पुरुष 84771

वर्ष 2002 में त्रिवेंद्र सिंह रावत पहली बार विधायक बने। 2007 में दोबारा चुने गए। 2012 में डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक जीते और 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीत दर्ज की। कांग्रेस इस सीट पर केवल 2014 में हुए उपचुनाव में जीती।

भाजपा से उन वादों का हिसाब किताब मांगा जा रहा है, जो अब तक पूरे नहीं हुए। सीएचसी की बदहाली, चीनी मिल का नवीनीकरण समेत सभी मुद्दे पर काम होगा।
-गौरव सिंह चौधरी, कांग्रेस प्रत्याशी

हम विकास के मुद्दे पर चुनाव में हैं। पिछले पांच साल में डोईवाला चुनाव क्षेत्र में जितना विकास हुआ है, वह अभूतपूर्व है। विकास की गति सतत है। इसे आगे बढ़ाऊंगा। 
 -बृजभूषण गैरोला, भाजपा प्रत्याशी

हम जनता का दिल जीतने का काम करेंगे। क्षेत्र की समस्या का चिह्नीकरण कर प्राथमिकता के साथ निदान होगा। भाजपा सरकार ने जनता को छला है। 
-जितेंद्र सिंह नेगी, निर्दलीय प्रत्याशी

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की डोईवाला विधानसभा सीट के चुनावी दंगल में बेशक चिर प्रतिद्वंद्वी भाजपा और कांग्रेस ने नए पहलवान उतारे हैं, लेकिन मुकाबले से बाहर होने के बावजूद यहां दो सियासी धुरंधरों की प्रतिष्ठा भी दांव पर मानी जा रही है।

भाजपा अपने दुर्ग को बचाने, कांग्रेस इसे ढहाने और बगावत कर ताल ठोक रहे निर्दलीय दुर्ग में सेंध लगाने के लिए दांव पर दांव चल रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह इस बार भाजपा ने बृजभूषण गैरोला पर दांव लगाया है। वह त्रिवेंद्र की पसंद बताए जाते हैं।

यहां त्रिवेंद्र के ही नहीं हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र की सीट होने के नाते सांसद व पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के सियासी पकड़ की भी परीक्षा है। यही वजह है कि पार्टी प्रत्याशी के लिए दोनों दिग्गज भी दमखम लगा रहे हैं। भाजपा के बागी जितेंद्र नेगी के चुनाव मैदान में होने से कांग्रेस फायदे की उम्मीद में है।

ये भी पढ़ें…Uttarakhand Election 2022:  प्रधानमंत्री टिहरी जिले के मतदाताओं को करने वाले वर्चुअली संबोधित, लेकिन कार्यक्रम हुआ स्थगित

भाजपा और कांग्रेस की मिश्रित हवा है। आम आदमी पार्टी, उक्रांद समेत सभी 10 प्रत्याशी कोशिश में हैं कि अपने-अपने मजबूत दायरे से बाहर आकर चिर प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दे सकें। भाजपा त्रिवेंद्र राज के काम और मोदी मैजिक के भरोसे फिर भगवा बुलंद करने के मंसूबों के साथ मैदान में है।

कांग्रेस सिख और मुसलिम बहुल क्षेत्रों में पैठ बनाने और सत्तारोधी रुझान को वोटों में बदलने की कोशिश कर रही है। राज्य गठन के बाद पहली बार डोईवाला के समर में भाजपा और कांग्रेस ने स्थानीय उम्मीदवार मैदान में उतारा है। इसलिए खामोश नजर आने वाला मतदाता कह रहा है कि जीते कोई भी विधायक तो अपना (स्थानीय) ही होगा।

स्थानीय मुद्दे

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रो बोनो एग्रीमेंट, जंगली जानवरों की समस्या, बेरोजगार, किसानों के बकाया भुगतान की व्यवस्था, शिक्षा और सड़क आदि।

मतदाता कुल  

165776

महिला 80999

पुरुष 84771

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